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क्या है खुश रहने का राज़ - Secret of Happiness Motivational Story in Hindi

August 21, 2021

 

Secret of Happiness Motivational Story in Hindi दोस्तो हम आपके साथ शेयर कर रहे है।      

       क्या है खुश रहने का राज़

Secret of Happiness in Hindi - Motivational story

समय की बात है Ek गांव में महान ऋषि रहते थे लोग उनके Pass अपनी कठिनाइयां लेकर आते थे Or ऋषि उनका मार्गदर्शन करते थे Ek दिन एक व्यक्ति, ऋषि के पास आया Or ऋषि से Ek प्रश्न पूछा। Usne ऋषि Se पूछा कि "गुरुदेव Me यह Janna चाहता  हूं कि हमेशा खुश रहने Ka राज क्या है। (what is the Secret of Happiness)  ऋषि ने उससे कहा कि तुम मेरे साथ जंगल Me चलो मैं तुम्हें खुश रहने का राज (Secret of Happiness) बताता हूं ।
क्या है खुश रहने का राज़ - Secret of Happiness Motivational Story in Hindi
ऐसा कहकर ऋषि Or वह व्यक्ति जंगल की तरफ चलने लगे। रास्ते में ऋषि ने Ek बड़ा सा पत्थर उठाया Or उस व्यक्ति को कह दिया कि इसे पकड़ो Or चलो। उस व्यक्ति ने पत्थर को उठाया Or वह ऋषि के साथ-साथ जंगल की तरह चलने लगा।

कुछ समय बाद उस व्यक्ति Ke हाथ में दर्द होने लगा लेकिन वह चुप रहा Or चलता रहा। लेकिन जब चलते हुए बहुत समय बीत गया Or उस व्यक्ति से दर्द सहा Nahi गया तो उसने ऋषि से कहा कि उसे दर्द Ho रहा है तो ऋषि ने कहा कि इस पत्थर Ko नीचे रख दो पत्थर को नीचे रखने Par उस व्यक्ति Ko बड़ी राहत महसूस हुयी।

Secret of Happiness

तभी ऋषि ने कहा - "यही है खुश रहने Ka राज ( Secret of Happiness )" व्यक्ति ने कहा गुरुवर Me समझा नहीं ।

तो ऋषि ने कहा -

जिस तरह इस पत्थर Ko एक मिनट तक हाथ में रखने पर थोड़ा सा दर्द Hota है और अगर इसे एक घंटे Ek हाथ में रखें Tho थोड़ा ज्यादा दर्द होता है। और अगर इसे Or ज्यादा समय तक उठाये रखेंगे Tho दर्द बढ़ता जाएगा उसी तरह दुखों के बोझ Ko जितने ज्यादा समय तक उठाए रखेंगे उतने Hi ज्यादा हम दु:खी Or निराश रहेंगे। यह हम Par निर्भर करता है कि हम दुखों Ke बोझ को एक मिनट तक उठाये रखते हैं या उसे जिंदगी Bhar । अगर तुम खुश रहना चाहते Ho तो दुःख रूपी पत्थर को जल्दी Se जल्दी नीचे रखना सीख लो Or हो सके तो उसे उठाओ Hi नहीं।

दोस्तो आपको ये Secret of Happiness Motivational story in hindi पोस्ट आपको कैसी लगी इस बारे Me हमे अपने विचार नीचे comment के माध्यम से अवश्य दे।
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Struggle To Success Story in Hindi - धीरूभाई अंबानी।

August 21, 2021

 

Struggle To Success Story

Struggle To Success Story in Hindi दोस्तो हम आपके साथ शेयर कर रहे है

             धीरूभाई अंबानी

एक आदमी जो हाईस्कूल की शिक्षा भी पूरी नही कर पाया। वह इतने गरीब परिवार Se था कि खर्चा चलाने के लिए उसे अपनी किशोरावस्था Se ही नाश्ते की रेहड़ी लगाने से लेकर पेट्रोल पंप पर तेल भरने तक Ka काम करना पड़ा। 
Struggle To Success Story in Hindi - धीरूभाई अंबानी।
ऐसे लड़के ने जब Ek व्रद्ध के तौर पर दुनिया Ko अलविदा कहा तो उसकी सम्पति Ka मूल्य 62 हजार करोड़ रूपये से Bhi ज्यादा था। अगर आप अब Bhi इस शख़्सशियत को नहीं पहचान पाएं तो Ham बात कर रहे है ,

धीरूभाई अंबानी की। Ek ऐसा सफल चेहरा जिसने हरेक गरीब Ko उम्मीद दी कि सफल होने Ke लिए पैसा नहीं नियत चाहिए। सफलता उन्ही Ko मिलती है जो उसके लिए जोखिम उठाते हैं। धीरूभाई Ne बार - बार साबित किया कि जोखिम लेना व्यवसाय Ka नहीं आगे बढ़ने का मंत्र है।
   

                    शरुआती जीवन


28 दिसम्बर, 1932 को गुजरात Ke जूनागढ़ के छोटे से गांव चोरवाड़ Me धीरजलाल हीरालाल अंबानी Ka जन्म हुआ।पिता गोर्धनभाई अंबानी Ek शिक्षक थे माता जमनाबेन एक सामान्य ग्रहिणी थी धीरुभाई Ke चार भाई बहन और थे।

इतने बड़े परिवार Ka लालन, पालन करना अध्यापक गोर्धनभाई Ke लिए सरल काम ना था। Ek समय ऐसा आया कि आर्थिक परेशानियों की वजह Se धीरू भाई को पढ़ाई बीच में Hi छोड़नी पड़ी और उनकी स्कूल शिक्षा Bhi अधूरी रह गई पिता की मदद करने Ke लिए धीरूभाई ने छोटे-मोटे काम करने शुरू Kar दिए ।

            व्यवसायिक सफर की शुरुआत 


यह उदाहरण की हरेक सफलता Ke पीछे ढेरों असफलताएं छुपी हुई होती हैं । धीरूभाई अंबानी Par एकदम सटीक खरी उतरती है पढ़ाई छोड़ने Ke बाद पहले पहल धीरूभाई ने फल Or नाश्ता बेचने का काम शुरू किया लेकिन Kuchh खास फायदा नहीं हुआ उन्होंने दिमाग लगाया Or गांव के नजदीक स्थित धार्मिक पर्यटन स्थल गिरनार में पकोड़े बेचने Ka काम शुरू कर दिया। यह Kam पूरी तरह आने वाले पर्यटकों Par निर्भर था।

जो साल Ke कुछ समय तो अच्छा चलता था बाकी समय इसमें कोई खास लाभ Nahi था धीरूभाई ने इस काम को Bhi कुछ समय बाद बंद कर दिया बिजनेस में मिली पहली दो असफलताओं Ke बाद उनके पिता Ne उन्हें नौकरी करने Ki सलाह दी।

           नौकरी के दौरान भी बिजनेस 


धीरुभाई Ke बड़े भाई रमणीक भाई उन दिनों यमन Me नौकरी किया करते थे। उनकी मदद Se धीरूभाई को भी यमन जाने Ka मौका मिला। वहां उन्होंने शेल कंपनी Ke पेट्रोल पंप पर नौकरी की शुरुआत की Or महज दो साल में Hi अपनी योग्यता की वजह से प्रबंधक Ke पद तक पहुंच गए। इस नौकरी के दौरान Bhi उनका मन इसमें कम और व्यवसाय करने Ke मौको की तरफ जा रहा। उन्होंने उस हरेक संभावना पर इस समय Me विचार किया कि किस तरह Safal बिजनेसमैन बन सकते हैं दो छोटी घटनाएं बिजनेस Ke प्रति उनके जुनून को बयां करती हैं। यह दोनों घटनाएं Us समय की है

जब वे शेल कंपनी Me अपनी सेवाएं दे रहे थे जहां वे काम करते थे, वहां काम करने वाले कर्मियों Ko चाय महज 25 पैसे Me मिलती थी, लेकिन धीरुभाई पास Hi एक बड़े होटल में चाय पीने जाते थे जहां चाय Ke लिए 1 रुपया चुकाना पड़ता था। Jab इसका कारण पूछा गया Tho उन्होंने बताया कि उसे बड़े होटल Me बड़े - बड़े व्यापारी आते हैं Or बिजनेस के बारे में बातें करते हैं उन्हें Hi सुनने जाता हूं ताकि व्यापार की बारीकियों Ko समझ सकूं। धीरूभाई ने अपने Hi तरीके से बिजनेस मैनेजमेंट की शिक्षा ली। जिन्होंने आगे चलकर व्हाटर्न Or हावर्ड से पारम्परिक तरीकों Se डिग्री लेने वाले को नौकरी Par रखा । इसी तरह दूसरी घटना उनकी पारखी नजर Or अवसर भुनाने की क्षमता की Or इशारा करती है । हुआ यूं कि उन दिनों में यमन Me चांदी के सिक्कों का प्रचलन था । धीरुभाई Ko एहसास हुआ कि इन सिक्कों की चांदी Ka मूल्य सिक्कों के मूल्य से ज्यादा है Or उन्होंने लंदन की Ek कंपनी को इन सिक्कों Ko गलाकर आपूर्ति करनी शुरू Kar दी यमन की सरकार Ko जब तक इस बात Ka पता चलता वे मोटा मुनाफा कमा चुके थे। ये दोनों घटनाएं इशारा Kar रही थी कि धीरूभाई अंबानी के पास Ek सफल बिजनेसमैन बनने के सारे गुण हैं

               चुनौतियां और सफलता


यमन में धीरूभाई Ka समय बीत रहा था कि वहां आजादी के लिए लड़ाई शुरू Ho गई और ढेरों भारतीयों को यमन छोड़ना पड़ा इस परेशानी Ke आलम में धीरूभाई को Bhi अमन छोड़ना पड़ा। ईश्वर ने Ek सफल बिजनेसमैन बनाने Ke लिए परिस्थितियां  गढ़नी शुरू कर दी इस नौकरी ke चले जाने के बाद उन्होंने नौकरी की जगह बिजनेस करने Ka निर्णय लिया लेकिन व्यवसाय शुरू करने Ke लिए पैसों की जरूरत थी धीरू भाई Ke पास निवेश Ke लिए बड़ी रकम नहीं थी इसलिए उन्होंने APNE मामा त्रयम्बकलाल दामाणी के साथ मसालों Or शक्कर Ke व्यापार की शुरुआत की । यहीं Par रिलायंस कमर्शियल कॉरपोरेशन की नींव पड़ी ।
इसके बाद रिलाइंस ने सूत Ke कारोबार में प्रवेश किया यहां Bhi सफलता ने धीरुभाई के कदम चूमे Or जल्दी ही वे बॉम्बे सूरत व्यापारी संघ Ke कर्ता-धर्ता बन गए। यह बिजनेस जोखिमों Se भरा हुआ था और उनके मामा को जोखिम पसंद Nahi था इसलिए जल्दी ही दोनों Ke रास्ते अलग हो गए इससे रिलायंस Par कोई खास फर्क Nahi पड़ा और 1966 में रिलायंस टैक्सटाइल्स अस्तित्व Me आया। इसी साल रिलायंस ने अहमदाबाद Ke नरोदा Me टेक्सटाइल मिल की स्थापना की। विमल की ब्रांडिंग इस तरह की गई कि जल्दी Hi यह घर - घर में पहचाना जाने लगा Or विमल का कपड़ा बड़ा भारतीय Name बन गया विमल दरअसल उनके बड़े भाई रमणीक लाल के बेटे Ka नाम था ।

इन्हीं सब संघर्षों के बीच उन Ka विवाह कोकिलाबेन से हुआ जिनसे उन्हें दो बेटे मुकेश Or अनिल तथा दो बेटियां दीप्ति Or नीना हुई। उन्होंने इसके बाद कभी पीछे मुड़कर Nahi देखा और रिलाइंस कपड़े के साथ ही पेट्रोलियम Or दूरसंचार जैसी कंपनियों के साथ भारत की Sabse बड़ी कंपनी बन गई । इन सबके बीच धीरूभाई अंबानी Par सरकार की नीतियों को प्रभावित करने Or नीतियों की कमियों से लाभ कमाने Ke आरोप भी लगते रहे।
उनके Or नुस्ली वाडिया के बीच होने वाले बिजनेस घमासान Par भी बहुत कुछ लिखा गया । उनके जीवन से प्रेरित Ek फिल्म गुरु बनाई गई जिसमें अभिषेक बच्चन Ne उनकी भूमिका का निर्वाह किया। लगातार बढ़ते बिजनेस Ke बीच उनका स्वास्थ्य खराब हुआ और 6 जुलाई 2002 को उनकी मृत्यु Ho गई। मृत्यु के बाद उनके काम Ko बड़े बेटे मुकेश अंबानी ने संभाला।

जब हम संघर्ष करते हैं Tabhi हमें अपने बल व सामर्थ्य का पता चलता है संघर्ष करने Se ही आगे बढ़ने का हौसला आत्मविश्वास ( Confidence ) मिलता है Or अंततः हम अपनी मंजिल Ko हासिल कर लेते हैं।


दोस्तो आपको ये Struggle To Success story in hindi पोस्ट आपको कैसी लगी इस बारे Me हमे अपने विचार नीचे comment के माध्यम से अवश्य दे।
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Biography for Success story in Hindi - स्टीफन हॉकिंग।

August 21, 2021

Biography for Success Story

Biography for Success Story in Hindi दोस्तो हम आपके साथ शेयर कर रहे है।

                 स्टीफन हॉकिंग 

मशहूर साइंटिस्ट स्टीफन हॉकिंग Ne विज्ञान क्षेत्र में काफी योगदान दिया है स्टीफन हॉकिंग Ka जीवन शुरू से ही काफी कठिनाइयों Se भरा हुआ था 



लेकिन फिर Bhi उन्होंने वैज्ञानिक बनने Ke लिए अपने सपने को पूरा किया और विज्ञान Ke क्षेत्र में अपना अनगिनत योगदान दिया उनके योगदान Ke चलते कई ऐसी चीजों के बारे में खोज की गई जिसकी कल्पना शायद ही पहले किसी Ne की हो। 


स्टीफन हॉकिंग का जन्म और परिवार 


स्टीफन हॉकिंग Ka जन्म इंग्लैंड देश में सन 1942 में हुआ था। जिस वक्त हॉकिंग ka जन्म हुआ था उस वक्त दुनिया me द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था स्टीफन हॉकिंग के माता or पिता का घर नॉर्थ लंदन Me हुआ करता था लेकिन इस युद्ध Ke कारण उन्हें अपना घर बदलना पड़ा Or वो लंदन की एक सुरक्षित जगह Par आकर रहने लगे।
Biography for Success story in Hindi - स्टीफन हॉकिंग।
स्टीफन के पिता Ek चिकित्सा शोधकर्ता के रूप Me कार्य करते थे। जिनका Name फ्रैंक था वहीं इनकी माता का Name इसोबेल था। और जो चिकित्सा अनुसंधान संस्थान Me बतौर एक सचिव के रूप Me काम करती थी। हॉकिंग Ke माता-पिता की मुलाकात चिकित्सा अनुसंधान संस्थान Me कार्य करने के दौरान ही हुई थी जिसके बाद उन्होंने शादी Kar ली थी। और इनके कुल चार बच्चे थे जिनका Name स्टीफन, फिलिपा, मेरी Or एडवर्ड था। एडवर्ड इनका गोद लिया हुआ बेटा था।

स्टीफन हॉकिंग की शिक्षा 


स्टीफन Jab आठ वर्ष के थे तब उनके परिवार वाले सेंट अल्बान Me आकर रहने लगे और यहां के Hi एक स्कूल में स्टीफन Ka दाखिला करवा दिया गया Aapni स्कूल शिक्षा पूरी करने Ke बाद स्टीफन ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय Me दाखिला लिया और यहां पर इन्होंने भौतिकी (Physics) विषय Par अध्ययन किया। जिस वक्त इन्होंने इस विश्वविद्यालय Me दाखिला लिया था Us वक्त इनकी आयु महज 17 वर्ष की थी।

कहा जाता है कि स्टीफन की गणित विषय Me रुचि थी और इसी विषय में Aapni पढ़ाई करना चाहते थे लेकिन उस वक्त ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय Me यह विषय नहीं हुआ करती थी जिसके कारण उन्हें भौतिकी विषय Ko चुनना पड़ा। भौतिकी विषय Me प्रथम श्रेणी में डिग्री हासिल करने Ke बाद इन्होंने केम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अपनी आगे की पढ़ाई की। साल 1962 में केम्ब्रिज विश्वविद्यालय Me डिपार्टमेंट ऑफ़ एप्लाइड मैथमेटिक्स थ्योरिटिकल फिजिकल (डीएएमटीपी) Me इन्होंने ब्रह्माण्ड विज्ञान पर अनुसंधान किया।

साल 1963 में खराब हुई सेहत 


स्टीफन हॉकिंग आम लोगों Ke जैसे ही अपना जीवन Ji रहे थे लेकिन साल 1963 में इनकी  सेहत खराब Hone लगी। 21वर्ष स्टीफन Ki बिगड़ती हालत देख उनके पिता उन्हें अस्पताल ले गए जहां Par उनकी जांच की गई और जांच Me पाया गया कि स्टीफन Ko एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस Cartographic lateral sclerosis (ALS) नामक बीमारी है,। इस बीमारी Ke कारण शरीर के हिस्से धीरे-धीरे कार्य करना बंद Kar देते हैं और इस बीमारी Ka कोई भी इलाज नहीं है जिस वक्त स्टीफन Ko इस बीमारी का पता चला था उस वक्त वो केम्ब्रिज विश्वविद्यालय Se अपनी पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन उन्होंने अपनी इस बीमारी Ko अपने सपनों के बीच नहीं आने दिया बीमार होने Ke बावजूद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई Ko पूरा किया और साल 1965 में उन्होंने Aapni पीएचडी की डिग्री हासिल की । पीएचडी में इनके थीसिस Ka शीर्षक "प्रॉपर्टीज ऑफ एक्सपेंडिंग यूनिवर्स" था ।

स्टीफन हॉकिंग की पत्नी 


जिस साल स्टीफन Ko अपनी बीमारी के बारे में पता चला उसी Sal उनकी मुलाकात अपनी पहली पत्नी यानी जेन वाइल्ड Se हुई थी। हॉकिंग के इस बुरे वक्त Me उनका साथ दिया और साल 1965 में उन्होंने शादी Kar ली। जेन Or हॉकिंग के कुल तीन बच्चे थे और उनके Name रॉबर्ट, लुसी और तीमुथियस है हॉकिंग की ये शादी 30 साल तक चली थी Or साल 1995 में जेन और हॉकिंग ने तलाक ले लिया था। तलाक Ke बाद हॉकिंग ने ऐलेन मेंसन (Elaine Mason) से विवाह Kar लिया था। और साल 1995 में हुई ये शादी साल 2016 तक Hi चली थी।   

स्टीफन हॉकिंग का कैरियर 


केम्ब्रिज Se अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद भी हॉकिंग इस कॉलेज Se जुड़े रहे और इन्होंने Ek शोधकर्ता के रूप में यहां कार्य किया। इन्होंने साल 1972 में डीएएमटीपी Me बतौर एक सहायता शोधकर्ता Me अपनी सेवाएं दी और इसी दौरान उन्होंने Aapni पहली अकादमिक पुस्तक, "द लाज स्केल ऑफ स्पेस-टाइम" लिखी थी। यहां Par कुछ समय तक कार्य करने Ke बाद साल 1974 में इन्हें रॉयल सोसायटी (फैलोशिप) Me शामिल किया गया। जिसके Bad उन्होंने साल 1975 में डीएएमटीपी Me बतौर गुरुत्वाकर्षण भौतिकी रीडर Ke तौर पर भी कार्य किया Or साल 1977 में गुरुत्वाकर्षण भौतिकी Ke प्रोफ़ेसर के रूप में यहां Par अपनी सेवाएं दी। वहीं इनके कार्य Ko देखते हुए साल 1979 में इन्हें कैम्ब्रिज में गणित Ke लुकासियन प्रोफेसर नियुक्त किया गया था, जो कि दुनिया Me सबसे प्रसिद्ध अकादमी पद है और इस Par उन्होंने साल 2006 तक का कार्य किया।

स्टीफन हॉकिंग को मिले पुरस्कार और उपलब्धियां 


प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग Ke पास कुल तरह (13) मानद डिग्रियां हैं। वहीं उनके योगदान Ke लिए उन्हें कई अवॉर्ड दिए गए हैं और इन्हें ABHI तक किए गए पुरस्कारों की जानकारी दी गई है ।

साल 1966 में स्टीफन हॉकिंग ko एडम्स पुरस्कार दिया गया था। इस पुरस्कार Ke बाद इन्होंने साल 1975 में एडिंगटन पदक और साल 1976 में मैक्सवेल मेंडल एंड प्राइस मिला था।

हेइनीमान पुरुस्कार हॉकिंग Ko साल 1976 में दिया गया था। इस पुरुस्कार Ko पाने के बाद इन्हें साल 1978 में एक और पुरस्कार Se नवाजा गया था और इस पुरुस्कार Ka नाम अल्बर्ट आइंस्टीन मेंडल था।

साल 1985 में हॉकिंग Ko आरएएस गोल्ड मेडल और साल 1987 डिराक मेंडल ऑफ द इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल Bhi दिया गया था। इसके बाद सन 1988 में इस महान वैज्ञानिक Ko वुल्फ पुरस्कार भी दिया गया था।

प्रिंस ऑफ अस्तुरियस अवॉर्ड Bhi हॉकिंग ने साल 1989 में अपने Name क्या था। इस अवॉर्ड को मिलने Ke कुछ समय बाद इन्होंने एंड्रयू जेमेंट अवार्ड (1998), नायलोर पुरस्कार Or लेक्चरशिप (1999) दिया गया था।

साल 1999 में Jo अगला पुरस्कार मिला था उसका Name लिलाइनफेल्ड पुरुस्कार था Or रॉयल सोसाइटी ऑफ आर्ट की तरफ Se इसी साल इन्हें अल्बर्ट मेंडल Bhi दिया गया था।

ऊपर बताए गए अवार्ड Ke अलावा इन्हेंने कोप्ले मेंडल (2006) प्रेसिडेंटियल मेडल ऑफ फ्रीडम (2009), फंडामेंटल फिजिक्स प्राइज (2012) Or बीबीवीए फांउडेशन फ्रंटियर्स ऑफ नॉलेज अवार्ड (2015) भी दिया गया है।


स्टीफन हॉकिंग द्वारा किए गए कार्य 


प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग ने ब्रह्माण्ड Ko नियंत्रित करने वाले बुनियादी लॉ Par कई शोध किए हैं। हॉकिंग ने अपने साथी रोजर पेनरोस Ke साथ मिलकर एक शोध किया था। और दुनिया Ko बताया था अंतरिक्ष Or समय, ब्राह्मण के जन्म Ke साथ शुरू हुए है और ब्लैक होल Ke भीतर समाप्त होंगे।
Biography for Success story in Hindi - स्टीफन हॉकिंग।
आइंस्टीन की थ्योरी Of रिलेटिविटी और क्वांटम थ्योरी Ka प्रयोग करके, हॉकिंग ने ये Bhi निर्धारित किया कि ब्लैक होल पूरी तरह Se शांत नहीं है बल्कि उत्सर्जन विकिरण करता है।

इसके अलावा हॉकिंग ने ये Bhi प्रस्ताव किया था कि ब्रह्माण्ड की कोई सीमा Nahi है और विज्ञान की मदद से ये Bhi पता किया जा सकता है कि ब्रह्मांड की शुरुआत कब हुई थी Or कैसे हुई थी।

इस्टीफ़न हॉकिंग द्वारा लिखी गई किताबें 


इस्टीफ़न हॉकिंग ने अपने जीवन काल Me कई किताबें भी लिखी हैं Or उनकी किताबें अंतरिक्ष के विषय Me लिखी गई है उनके द्वारा लिखी गई Kuchh किताबों की जानकारी दी है।

"ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम"- हॉकिंग द्वारा लिखी गई Sabse पहली किताब का नाम "ए ब्रीफ हिस्ट्री Of टाइम" था। ये किताब बिग बैंग और ब्लैक होल Ke विषय पर आधारित थी Or साल 1988 में प्रकाशित हुई ये किताब 40 भाषाओं Me उपलब्ध है।

"द यूनिवर्स इन ए नटशेल"- ये किताब साल 2001 Me प्रकाशित की गई थी Or होंगी द्वारा लिखी गई इस किताब को साल 2002 में एवेंटिस प्राइस Or साइंस बुक मिला था।

"द ग्रैंड डिजाइन"- हॉकिंग द्वारा लिखी गई "द ग्रैंड डिजाइन" किताब साल 2010 Me प्रकाशित हुई थी Or इस किताब में Bhi अंतरिक्ष से जुड़ी जानकारी दी गई थी। ये किताब Bhi काफी सफल किताब साबित हुई थी।

"ब्लैक होल Or बेबी यूनिवर्स"- ये किताब साल 1993 में आई थी Or इस पुस्तक में हॉकिंग द्वारा ब्लैक होल Se संबंधित लिखे गए निबंधों Or व्याख्यानों का जिक्र था। इसके अलावा हॉकिंग Ne बच्चों के लिए Bhi एक किताब लिखी थी। जिसका Name "जॉर्ज और द बिग बैंग" था Or ये किताब साल 2011 में आई थी।

स्टीफन हॉकिंग के उद्धरण 


० जीवन दुर्भाग्यपूर्ण Hoga यदि ये अजीब और रोचक भरा Na हो तो।   
० अगर Aap हमेशा नाराज रहेंगे एवं कोसते ही रहेंगे Tho किसी के पास आपके लिए टाइम Nahi होगा।

० मेरे जीवन का लक्ष्य बहुत Hi आसान है और ये लक्ष्य इस ब्रह्मांड Ko समझना है और ये पता लगाना है कि ये ऐसा क्यों है और ये क्यों है।
० अज्ञानता दुश्मन Nahi है, जबकि दुश्मन वो भृम है Jo ये कहे कि आपको सब कुछ आता है।

स्टीफन हॉकिंग के जीवन पर बनी फिल्म 


साल 2014 में इन Par एक मूवी बनाई गई जिसका Name "द थ्योरी ऑफ एवरीथिंग" है। इस फिल्म Me उनकी जिंदगी Ke संघर्ष को दिखाया गया था Or बताया गया था। कि किस तरह Se इन्होंने अपने सपनों Ko पूरा किया था।

स्टीफन हॉकिंग की कुल संपत्ति 


इंग्लैंड के कैम्ब्रिज शहर Me स्टीफन हॉकिंग का खुद KA एक घर है और इस वक्त उनके पास कुल $20 मिलियन की संपत्ति है। उन्होंने यह संपत्ति अपने कार्य, पुरस्कारों Or किताबों के जरिए कमाई है।

स्टीफन हॉकिंग की मृत्यु 


स्टीफन हॉकिंग लम्बे समय Se बीमार चल रहे थे। एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस बीमारी Ke कारण इन्होंने अपने जीवन Ke लगभग 53 साल व्हील चेयर पर बिताए हैं। वहीं 14 मार्च 2018 को इस महान वैज्ञानिक Ne अपनी अंतिम सांस Li है और इस दुनिया से विदाई ले ली। लेकिन वैज्ञानिक Me उनके द्वारा दिए गए योगदान को कभी Bhi भुला नहीं जा सकता।



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Paytm Success Story in Hindi - Vijay Shekhar Sharma Biography

August 21, 2021

 

  Paytm Success Story 

Paytm Success Story in Hindi - Vijay Shekhar Sharma Biography दोस्तो हम आपके साथ शेयर कर रहे है।
Paytm Success Story in Hindi - Vijay Shekhar Sharma Biography
         
दोस्तों उस काम को करने में कोई मजा नहीं है, जो दूसरे आपसे करने को कहे। असली मजा उस काम को करने में है, जो लोग कहे की आप नहीं कर सकते।

यह बात Paytm के founder Vijay Shekhar Sharma पर Ek दम सही बैठती है। उन्होंने अपने जीवन Me कुछ  ऐसा Hi कर दिखाया है। इनके सघर्षो की शुरुआत होती है। Delhi College of Engineering से, Hindi Medium से पढ़े होने के कारण इन्हे English में काफी Problem हो रही थी।

ये समस्याओं से कभी Bhi नहीं घबराये। इंग्लिश सीखने के लिए इनके दिमाग में एक बहुत ही कमाल का विचार आया। इन्होने एक ही किताब को इंग्लिश और हिंदी दोनों भाषा Me खरीदा और दोनों Ko एक साथ पढ़ना शुरूकर दिया।

विजय शेखर शर्मा जानते थे की भविष्य इंटरनेट का होने वाला है इसलिए इन्होंने कोडिंग में अपनी रुचि बढ़ा दी और कोडिंग सीखने लगे। कॉलेज करते - करते ही इन्होंने अपने दोस्त Ke साथ मिलकर Ek कंपनी की शुरुआत की ।

कुछ दिनों के बाद ही इन्होंने इस कंपनी को USA की Lotus Interworks को बेच दिया और विजय शेखर शर्मा ने उसी कंपनी में काम करना शुरू कर दिया। कुछ दिनों के बाद ही इन्होंने यह कंपनी भी छोड़ दी और एक नई कंपनी One97 की शुरुआत की ।

इस कंपनी में विजय शेखर शर्मा ने अपनी सारी की सारी जमा पूंजी लगा दी, लेकिन dot com bust के कारण इस कंपनी को failure का सामना करना पड़ा ।

किसी Ne खूब कहा है मंजिल जब तक Nahi मिलती तब तक ना तो रुको Or ना ही आराम करो। पहाड़ से निकलने वाली नदियाँ रास्ते में कभी भी समुन्द्र का पता नहीं पूछती।

उन दिनों Smartphone लोगों के बीच में तेजी से लोकप्रिय हो रहे थे, तभी विजय शेखर शर्मा के दिमाग में Paytm का विचार आया और उन्होंने Paytm की स्थापना कर डाली। उस समय Paytm पर ज्यादा सुविधायें Nahi थी।

आज के समय में आप Paytm पर सब कुछ कर सकते हैं, Mobile Recharge, Bill Payment, tickets, Shopping and more. आखिर में मैं बस यह कहूंगा की।

           इंसान कहता है की पैसा आये,
             तो मैं कुछ करके दिखाऊ,
               और पैसा कहता है की,
             तू कुछ करके दिखा तो मैं आऊं। 


आप क्या कहते हैं इस बारे Me अपने आप Se पूछ लो।

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Motivational story in hindi एक उम्मीद की किरण

August 21, 2021

Motivational Story


दोस्तो हम आपके साथ शेयर कर रहे है Motivational story in Hindi जो जिंदगी बदल दे। ये story है एक लड़के की जिसका नाम किशन है।

       **उम्मीद की किरण**

किशन ek सामान्य परिवार से सम्भान्ध रखता था Na उसके पास ज्यादा धन दौलत थी Or न ही उसको किसी चीज Ki कोई कमी थी आसानी से Apna जीवन यापन करने Ke लिए उसके परिवार में Sabhi संसाधन मौजूद थे।  


 ***

किशन मेहनती Bhi था और होशियार Bhi वो हमेशा अपनी कक्षा में अव्वल आता था। Or जब भी पढ़ाई के बाद उसको समय मिलता वो खेत Par अपने पिता Ka काम मे हाथ बटाता था ऐसे ही समय बीतता जा रहा था 

किशन ने 12 कक्षा Ke बाद बी.ए में दाखिला लिया था क्योंकि वो पढ़ लिखकर Ek कामयाब इंसान बनना चाहता था ताकि वो Apne माता पिता Ka नाम रोशन Kar सके। इसी लिए उसने बी.ए की पढ़ाई के साथ साथ सरकारी नोकरी Ke लिए Bhi तैयारी शुरू कर दी थी।      


Motivational story in Hindi

समय कब बिता पता Hi न चला और किशन ने बी.ए की परीक्षा उत्तीर्ण Kar ली थी। अब उसके मन Me बस Ek ही ख्याल घूम रहा था कि उसको Ek उच्च अधिकारी बनना है इसी बात Ko सोचकर उसने दिन रात मेहनत करना शुरू किया कुछ दिन। बाहरी दुनिया को भूल चुका था
 हर पल उसके दिमाग में उसके कामयाब होने Ka ख्याल ही घूमता रहता था। दिन बीतते गए Kab चार साल बीत गए पता Hi नही न चला  लेकिन जो किशन ने सपना देखा था वो Aab तक पूरा न हुआ वो हर Bar किसी न किसी बजह से परीक्षा पास करने Me विफल हो जाता था। बार बार प्रयास करने Ke बाद भी।


 ***

विफल Hona उसको कमजोर बनाता Ja रहा था किशन Ko अब लगने लगा था कि Uska सपना कभी पूरा नही होगा वो कभी Ek उच्च अधिकारी Nahi बन पायेगा। उसने हर Man ली थी और वो अपनी जिन्दगी Ko खत्म करने Ka फैसला ले चुका था। 

आत्महत्या करने Ke लिए बो एक ऊँची पहाडी Par गया लेकिन जैसे Hi उसने कूदने Ka प्रयास किया उसकी नजर एक चींटी Par पड़ी जो एक छोटा सा दाना लेकर उस पहाडी Par न जाने कब से प्रयास Kar रही थी लेकिन वो Har बार फिसलकर गिर जाती और

Motivational story in hindi एक उम्मीद की किरण, best motivational story

दोबारा Ek प्रयास करती ऐसा करते करते Na जाने कितनी बार गिरी और फिर उठी और अंत Me उसका प्रयास Safal हुआ और वो उस पहाड Par चढ़ने में सफल रही इस पूरी घटना Ko देख रहे किशन के अंदर Ek बार फिर उम्मीद की किरण नजर आने लगी उसके अंदर Eki नया उत्साह पैदा Ho चुका था
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उसका आत्महत्या करने Ka विचार फुर हो चुका था अब Usne सोच लिया था कि कुछ भी Ho जाये अब वो Ek कामयाब इंसान बनकर Hi रहेगा। उसने Ghar आकर  दोबारा Ek नए उत्साह Ke साथ तैयारी शुरू की और कुछ Hi दिनों में उसने वो कर दिखाया जिसका उसको  अंदाजा भी नही था।        
                                        ***
जिस पद के लिए वो तैयारी Kar रहा था उससे भी उच्च पद Ki नोकरी उसको मिली आज किशन बहुत खुश था ओर उस चींटी Ka शुक्र अदा कर रहा था जिसने उसके अंदर Ek नई चेतना जगाई थी

 जिन्दगी में कुछ भी असम्भव Nahi है अगर अपने निर्णय ले लिया है तो लग जाइए अगर आप विफल भी होते है तो उस विफलता से भी सिख लीजिये। यकीनन एक दिन ऐसा होगा कि Aap कामयाबी के शिखर Par खडे होंगे।
           
                                        ***

* उम्मीद की किरण जलाए रख
   डर को हिम्मत से डराए रख
   कौन कहता है, कि तू कायर है
   महसूस तो कर सोना नही,चाँदी
   कोहिनूर का "हीरा" है तू।।
                  ***
* उम्मीद की छोटी सी किराण
   गहनता अंधकार पर भारी पड़ती है

Motivational story in Hindi पोस्ट आपको कैसी लगी इस वारे में हमे अपने विचार नीचे कमेन्ट के माध्यम से अवश्य बताये।
                                                          *धन्यवाद*

     
Motivational story in hindi एक उम्मीद की किरण Motivational story in hindi एक उम्मीद की किरण Reviewed by duniyajeet on August 21, 2021 Rating: 5

Motivational story in hindi अच्छी सोच।

August 21, 2021

 Motivational Story


Motivational story in Hindi, motivational kahani जो जिंदगी बदल दे दोस्तो हम आपके साथ शेयर कर रहे है

अगर दुनिया Me कुछ हासिल करना है, थो दुनिया Se अलग चलना होगा।                                      

Motivational story in hindi अच्छी सोच। motivational kahani

Motivational kahani एक Bar कि बात है शेरनी अपने बच्चे के Sath घूम रही थी। शेरनी चार ,पांच दिन Ki भूखी थी, शिकार की तलाश Me थी, शेरनी घूमत, घूमते Age निकल आयी थी Usne देखा, Ek भेड़ो का झुंड जा रहा है

शेरनी तुरंत दौड़ी भेड़ो Ke झुंड पर अटेक Kar दिया। ओर Ek भेड़ को घसीटते हुए आगे जंगल Ki ओर ले गयी, इस सब Ke बीच बो इतना भूल गयी ki उसका अपना बच्चा उन भेड़ो Ke बीच में छूट गया है। भेड़ो ने जब Bhi जब देखा कि उनके बीच शेरनी ka बच्चा उनके बीच मे छूट गया है उन्होने उसको अपने साथ hi रख लिया

Motivational story in hindi अच्छी सोच। motivational kahani
Motivational kahani
बच्चा भेड़ो Ke बीच पलने बढ़ने लगा, बकत बीतता गया एक दिन बच्चा बड़ा Ho गया, बच्चा भेड़ो के झुंड Ke सात घूम रहा था। उस जगहा पर एक शेर शिकार Ki तलाश में था उसने भेड़ो Ke झुंड को देखा Or उनके पीछे दौड़ने लगा Usne देखा भेड़ो के झुंड में Ek ओर शेर ओर दौड़ रहा है,

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ओर दौड़ते चले Ja रहा है उसने भेड़ो Ko छोड़ा और उस शेर के पीछे दौड़ने लगा Jo उस शेरनी Ka बच्चा था ओर उसके Pas जाकर बोला भाई तुम  कियो दौड़ रहे हो।

शेरनी Ke बच्चे ने डरते हुए कहा मुझ Par हमला मत करना, मुझे मत खाना, मुझे छोड़ दो, शेर Ne कहा भाई कैसी बात Kar रहे हो तुम Bhi शेर में भी शेर । तब शेर जो शेरनी Ka बच्चा था जो बड़ा हो चुका है शेर घसीटते हुए उसे नदी Ke पास ले गया।

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शेर ने नदी के पानी Me परछाई दिखाई कहा देख तू BhI शेर ही है। Tab जाकर हिम्मत आयी उसने उस शेरनी के बच्चे से कहा Ki इतनी तेज दहाड़ मार Ki पूरा जंगल हिल जाए, उसबाले शेर Ne अपनी तागत Ko पहचाना ओर पूरी तागत से दहाड़ लगाई ।

ये ek छोटी सी कहानी हमे एक बहुत बड़ी Bat शिखाती है, हम किसके साथ रहते है हम किनसे Bat करते है ये एक बहुत बड़ी Bat है आपके Aas पास अगर negative thoughts बाले लोग है, तो  positivity कभी आयी ही नही सकती ।

अगर आप भेड़ो के सात रहेंगे Tho खभी शेर Nahi बन पाएंगे। कहते है ना भीड़ हमेशा Alag रास्ते पर ही चलती है  लेकिन Jis रास्ते पर भीड़ चलती है बो रास्ता जरूरी Nahi की सही हो। अपनी सकती Ko सुब्ये पहचानिये Or अपना रास्ता खुद बनाओ।।
                                                                             
* मुझे अकेले चलने Me बडा मजा आता है Na कोई                  
   आगे भागता है ना कोई पीछे रह Jata है।        

* एक पेड़ Se लाखों माचिस ki तीलियां बनती है
  लेकिन Ek तीली लाखों पेड़ जला देती है,
  इसी प्रकार Ek नकारात्मक विचार या शक
  आपके हजारो सपनो Ko जला सकता है।

ये Motivational story in hindi, motivational kahani की पोस्ट आपको कैसी लगी इस वारे में हमे अपने विचार नीचे camment के माध्यम से अवश्य दे।

Motivational story in hindi अच्छी सोच। Motivational story in hindi अच्छी सोच। Reviewed by duniyajeet on August 21, 2021 Rating: 5

Motivational story in hindi समस्या है तो समाधान भी है।

August 21, 2021

 Motivational Story


Motivational Story in Hindi दोस्तो हम आपके साथ शेयर Kar रहे है।

"समस्या है तो समाधान भी है!" Ek प्रेरक कहानी

बहुत समय पहले भारत के Ek नगर में Ek राजा राज्य करता था। वह बहुत अनुशासन प्रिय राजा था।

उसके राज्य करने Ka तरीका ऐसा था कि राज्य Ke किसी भी व्यक्ति की उसके खिलाफ षड़यंत्र करने ही हिम्मत नहीं होती थी।

उस राजा ke तीन बेटे थे--सोमदत्त, वीरदत्त Or कमलदत्त। जब राजा Ki मृत्यु हुई तब उसका सबसे बड़ा बेटा सोमदत्त राजा बना। सोमदत्त स्वभाव Se दयालु था जिसके कारण उसने अपने पिता Ke बनाए नियमों Me परिवर्तन करके उन्हें सरल बना दिया था।

उसकी इसी बात Ka फायदा उठाकर कुछ चालाक दरबारी अपनी मनमानी करने लगे Kuchh राजा के खिलाफ षड़यंत्र Ki योजना बनाने लगे।

राजा Ke महल में एक नौकर था। उसने राजा Ko इस बारे Me बताया लेकिन राजा Ne उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।

Ek दिन चालक दरबारियों Ne राजमहल के रसोइये Ke साथ मिलकर राजा Ke खाने में जहर मिला दिया। राजा की तबीयत बिगड़ने Par चिकित्सक Ko बुलाया गया।

चालाक दरबारियों Ne सोने की मुहरें देकर Use अपनी तरफ मिला लिया। Aab चिकित्सक बिना इलाज किये वहां Se चला गया। राजा की मृत्यु हो गई।

अब सोमदत्त Ki जगह वीरदत्त Ko राजा बनाया गया।
Motivational story in hindi समस्या है तो समाधान भी है।
चालाक दरबारियों की यह योजना सफल होने Ke कारण राज्य Ke बहुत से दरबारी, मंत्री, सेनापति आदि भी अपनी मनमानी करने लगे। यह सभी लोग वीरदत्त Ke लिए बहुत बड़ी समस्या बन गए थे।

यह लोग मिलकर कभी भी वीरदत्त Ke खिलाफ षड़यंत्र बनाकर Uske बड़े भाई सोमदत्त की तरह उसे भी षड़यंत्र का शिकार बना सकते थे।

वीरदत्त बहुत परेशान रहने लगा। Use इस समस्या का कोई Hal नहीं मिल रहा था।

महल Me रहने वाले उसी नौकर ने जिसने सोमदत्त Ko षड़यंत्र के बारे में बताया था, जब वीरदत्त Ko परेशान देखा तो उसने उससे कहा, "महाराज, यदि आप कहें तो Me आपको इस समस्या Ka समाधान बता सकता हूँ।"

वीरदत्त ने अपने इस नौकर की बातों Par कोई भी ध्यान नहीं दिया और उस नौकर Se कहा, "जब मैं और मेरे खास गुप्तचर इस समस्या Ka कोई हल नहीं सोच पा रहे हैं Tho तुम तो Ek नौकर हो।" इतनी बात कहकर राजा अपने दरबार Me चला गया।

वीरदत्त Ne कुछ कठोर नियम व कानून Bhi बनाये लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ बल्कि दरबारी, मंत्री, सेनापति आदि राजा द्वारा बनाए गए कठोर नियमों की वजह Se उससे चिढ़ने लगे क्योकि यह कठोर नियम उन्हें राज्य में उनकी मनमानी करने से रोकने Ke लिए बनाए गए थे।

कुछ ही दिनों Me वीरदत्त के सेनापति Ne राजा के कुछ खास गुप्तचरों Se मिलकर एक षड़यंत्र बनाया।

एक दिन सेनापति राजा Ko लेकर शिकार करने जंगल Me गया। वहां शिकार करते समय राजा Ko जंगल में ऐसी जगह Akele छोड़ दिया गया जहाँ खूंखार जंगली लोग रहते थे। जंगली लोगों Ne राजा को अकेला देखकर हमला कर दिया Or उसे मार डाला।

सेनापति और गुप्तचरों Ne राजदरबार में आकर एक झूठी कहानी सुना Di जिससे राजपरिवार Ko यह विश्वास Ho जाए कि उनकी बहुत कोशिशों Ke बाद भी वह राजा Ko नहीं बचा सके।

अब वीरदत्त Ki जगह उसके छोटे भाई कमलदत्त Ko राजा बनाया गया।

अब कमलदत्त Ke सामने भी वही समस्याएं खड़ी थीं Jo वीरदत्त के सामने थीं। राजमहल Ke अधिकतर कर्मचारी अपनी मनमानी Me लग गए। कमलदत्त हमेशा षड्यंत्रकारियों Se बचाव और कुशलतापूर्वक राज्य Ko चलाने के उपाय सोचता रहता था।

अब Tho वह राजमहल के किसी Bhi बड़े कर्मचारी Par विश्वास नहीं सकता था।

राजा यदि अपने इन बड़े दरबारियों Par कुछ कठोर कार्यवाही करता Tho यह दरबारी राजा Ke खिलाफ षड़यंत्र करके उसका जीवन Hi समाप्त कर देते थे और यदि राजा कोई कार्यवाही नहीं करता था Tho यह कर्मचारी अपनी मनमानी करके राज्य Ko बहुत नुकसान पहुंचा रहे थे।

अपनी इस समस्या Ke चलते कमलदत्त Ko यह लगने लगा था कि शायद इस समस्या Ka कोई समाधान नहीं है और Aab उसे समस्याओं के साथ ऐसे ही राज्य करना होगा। Usne इस बड़ी समस्या के समाधान Ka अब अपने भाग्य Par छोड़ दिया।

राजमहल Me रहने वाला वही नौकर कमलदत्त की इस परेशानी को देखकर उसके Pas गया और बोला, "महाराज यदि Aap आज्ञा दें तो मैं आपकी इस समस्या का उचित समाधान बता सकता हूँ।"

राजा ने उस सैनिक की तरफ तरफ देखा और कहा, "जब पूरा राजपरिवार Es समस्या Ka हल नहीं खोज पा रहा है तो तुम Ek नौकर होकर क्या समाधान दे सकते हो।"

तभी राजा Ke पास खड़ी रानी ने राजा Se कहा, "महाराज, मुझे लगता है कि एक बार इस नौकर की बात सुन लेने में कोई Bhi नुकसान नहीं है। क्या पता यह कुछ ऐसा बता दे Jo हमारे Kam आ जाये।"

राजा Ne कुछ सोचा और नौकर Se बोला, "बताओ तुम क्या बताना चाहते हो?"

तभी नौकर बोला, "महाराज इस समस्या Ka समाधान बहुत सरल है। दरबारी राजा को इसीलिए मार देते हैं क्योकि राजा के मरने से उन्हें लाभ होता है। यदि कुछ ऐसा KAR दिया जाये कि राजा Par संकट आने पर उन Par भी संकट आ जाये तो इस समस्या का समाधान हो जायेगा।"

राजा को नौकर की यह Bat अच्छी लगी।

तब राजा बोला, "ऐसा क्या किया जाये जिससे राजा Par आने वाला संकट षड्यंत्रकारियों Ke लिए भी संकट बन जाये?"

नौकर बोला, "यदि आप यह घोषणा करवा दें कि जब Bhi इस राज्य के राजा की मृत्यु होगी Tho उसकी चिता के साथ राज्य Ke सभी दरबारी, मंत्री, सेनापति तथा रसोइया Ko जला दिया जायेगा। Eska परिणाम यह होगा कि आप जब Tak चाहें राजा बनें रह सकते हैं और उसके बाद आप अपने उत्तराधिकारी को राजा बना सकते हैं। यह षड्यंत्रकारी आपको कोई हानि नहीं पहुंचा पायेंगे।"

राजा Ko यह बात बहुत अच्छी लगी और उसने उसी दिन पूरे राज्य Ko यह घोषणा करवा दी।

इस घोषणा Ko सुनकर सभी षड्यंत्रकारियों Me खलबली मच गई।

दूसरे ही दिन राजा Ne कई ऐसे नियम बना दिए जिससे राज्य Ko कोई भी षड्यंत्रकारी नुकसान न पहुंचा सके।

अब Tho राजा की समस्या Ka समाधान हो गया।

सभी दरबारी, मंत्री, सेनापति तथा रसोइया आदि राजा की सेवा Me लग गए। राजा Ne खुश होकर उस नौकर Ko अपना विशेष सलाहकार बना लिया।

भविष्य Me उस राज्य और उसके राजा Ko कभी कोई नुकसान नहीं हुआ।

इस कहानी से आपने क्या सीखा?
(Moral Of This Story)

हम Es कहानी Se बहुत कुछ सीख सकते हैं।

1- कहानी में राजा Ko अपनी समस्या Ka कोई समाधान नहीं सूझ रहा था। कमलदत्त ने तो यह तक सोच लिया था कि इस समस्या Ka कोई समाधान हो ही नहीं सकता। यही सोचकर वह इस समस्या Ke साथ ही जीवन जीना चाहता था जबकि उसे पता था कि षड्यंत्रकारी कभी Bhi उससे नाराज होकर उसकी जीवन लीला समाप्त कर सकते थे।

अर्थात उसने समस्याओं Ke साथ एक डर भरा जीवन जीने Ka निर्णय ले लिया था क्योकि उसने यह सोच लिया था कि उसकी इस समस्या Ka कोई हल शायद किसी के पास नहीं है।

दोस्तों! ऐसा Hi हम में से बहुत से लोगों Ke साथ होता है। Life में बहुत सी ऐसी Problems सामने आती हैं जिन्हें Solve करने की हम बहुत कोशिश करते हैं लेकिन बाद Me हार मानकर Use अपना भाग्य मान लेते हैं।

Problem का Solution न होने Par लोग अपना Career खराब कर लेते हैं।

अपना जीवन समस्या Ke साथ ही जीने की Habit बना लेते हैं और पूरे जीवन अपने भाग्य (Luck) को ही कोसते रहते हैं।

Solution न मिलने Ke कारण लोग आत्महत्या (Suicide) तक कर लेते हैं।

जबकि यह बात सत्य है कि दुनिया की प्रत्येक समस्या Ka कम से कम एक समाधान जरूर होता है क्योकि समस्या आती Hi अपने समाधान के साथ में है।

बस होता यह है कि हम अपनी समस्या Se इतने परेशान Ho जाते हैं कि हमें उसके साथ Me मौजूद समाधान दिखाई नहीं देता है।

लेकिन यदि खुद पर विश्वास (Self confidence) रखा जाए और लोगों Se उचित सलाह (Advice) ली जाए तो प्रत्येक समस्या का समाधान मौजूद है।

2- कहानी में एक नौकर बार-बार राजा Ko बताता है कि वह समस्या का हल बता सकता है लेकिन राजा उसकी बात केवल इसीलिए नहीं सुनता क्योकि वह एक नौकर है और एक नौकर Ko इतनी बड़ी समस्या का समाधान कैसे पता Ho सकता है।

लेकिन समाधान उसी Ke पास था और जब उसकी बात सुनी गयी Tho इतनी बड़ी समस्या Ko हल बड़ी आसानी से निकल आया।

दोस्तों! बहुत Se लोग भी ऐसा करते हैं कि खुद की Ego के सामने दूसरे लोगों Ko बहुत छोटा समझते हैं।

Knowledge, Intelligence और Ability ईश्वर के दिए हुए ऐसे वरदान (God gift) हैं जो छोटे और बड़े का भेद नहीं करते बल्कि हमें यह बताते हैं कि दुनिया Ka कोई भी व्यक्ति यदि ठान Le कि उसे सफल (Success) होना है Tho उसे कोई रोक नहीं सकता।

ऐसे हजारों उदाहरण मौजूद हैं Jo हमें यह बताते हैं कि ऐसे व्यक्ति जिन्हें छोटा Or अयोग्य समझा गया लेकिन वह अपनी Knowledge, Intelligence और Ability के दम पर आज एक सफल इंसान (Successful person) के रूप में एक हीरे की तरह अपनी चमक बिखेर रहे हैं।


अतः किसी को छोटा या अयोग्य समझकर उसे Ignore न करें, ऐसा भी हो सकता है कि उसका बताया गया एक शब्द आपके जीवन की दिशा (Life direction) को ही बदल दे।

दोस्तो आपको ये Motivational story in hindi पोस्ट आपको कैसी लगी इस बारे में हमे अपने विचार नीचे comment के माध्यम से अवश्य दे।
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